हरतालिका तीज व्रत हर साल भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है. इसे तीजा पर्व के नाम से भी जाना जाता है 

इस दिन सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं.  वहीं  कुंवारी कन्याएं मनचाहे वर प्राप्त के लिए रखती है.

हरतालिका तीज में सोलह श्रृंगार करने का चलन है. हरतालिका तीज का पर्व देवी पार्वती और भगवान शिव के अटूट रिश्ते को ध्यान में रखकर मनाया जाता है.

शाम 06 बजकर 23 मिनट से रात 09 बजकर 02 मिनट तक

पहला प्रहर:

रात 09 बजकर 02 मिनट से 19 सितंबर को प्रात: 12 बजकर 15 मिनट तक

दूसरा प्रहर:

प्रात: 12 बजकर 15 मिनट से 19 सितंबर को प्रात: 03 बजकर 12 मिनट तक

तीसरा प्रहर:

प्रात: 03 बजकर 12 मिनट से 19 सितंबर को सुबह 06 बजकर 08 मिनट तक

चौथा प्रहर:

16 श्रृंगार करके माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा और व्रत करने से सुहागिन महिलाओं अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.

हरतालिका तीज पर सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें.

हरतालिका तीज की पूजा में फुलेरा का बहुत महत्व है. ये महादेव की पांच पुत्रियों का प्रतीक है.